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भारत में पहली तीन डोज वाली कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति शुरू, जानें इसकी कीमत क्या होगी?


भारत को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक और हथियार मिल गया है. स्वदेशी कंपनी Zydus Cadila ने अपनी कोरोना वैक्सीन ZyCov-D की आपूर्ति शुरू कर दी है। यह टीका 12 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को दिया जाएगा।


हालांकि, भारत में इसे 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए लगाया जाएगा। इस वैक्सीन की खास बात यह है कि इसमें किसी भी तरह की सुई का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि टीका एक सुई मुक्त टीका है। यह बिना सुई के दिया जाएगा। इसके अलावा, टीका तीन-खुराक है, जो इसे अन्य टीकों से अलग करता है।


Zydus Cadila वैक्सीन ZyCov-D को केंद्र सरकार ने पिछले साल अगस्त में मंजूरी दी थी। हालांकि, अभी तक इस वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं किया गया है।


4 चीजें जो जकोव-डी को खास बनाती हैं...


1. तीन-खुराक वाला टीका: दुनिया भर में अब तक प्रशासित टीकों की संख्या या तो एकल खुराक या दोहरी खुराक है। लेकिन ज़ायकोव-डी तीन खुराक में दिया जाने वाला पहला टीका है।


2. सुई मुक्त टीका: इसमें किसी सुई का प्रयोग नहीं किया जाएगा। इसमें जेट इंजेक्टर लगाया जाएगा। इसके अलावा, उच्च रक्तचाप वाले लोगों को टीका लगाया जाएगा। इस उपकरण का आविष्कार 1960 में किया गया था। WHO ने 2013 में इसके उपयोग को मंजूरी दी थी।


3. डीएनए आधारित टीका: ज़ाइकोव-डी दुनिया का पहला डीएनए आधारित टीका है। अब तक उपलब्ध सभी टीके mRNA का उपयोग करते हैं, लेकिन वे प्लास्मिड-डीएनए का उपयोग करते हैं।


4. स्टोरेज भी है आसान: इसका रखरखाव बाकी टीकों की तुलना में आसान है। इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है। इतना ही नहीं इसे 25 डिग्री सेल्सियस पर 4 महीने तक रखा जा सकता है।


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तीन खुराक लगाने में क्या अंतर है?


इस टीके की तीन खुराक 28-28 दिनों के अंतराल पर दी जाएगी। पहली खुराक के बाद दूसरी खुराक 28 दिनों के बाद और तीसरी खुराक 56 दिनों के बाद दी जाएगी।


कैसे काम करता है यह वैक्सीन?


जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, ज़ायकोव-डी एक प्लास्मिड-डीएनए वैक्सीन है। टीका शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए आनुवंशिक सामग्री का उपयोग करता है।


वर्तमान में उपलब्ध टीके mRNA तकनीक का उपयोग करते हैं। इसे मेसेंजर RNA कहते हैं। यह शरीर में जाकर कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने का संदेश देता है।


वहीं, प्लास्मिड मानव कोशिकाओं में मौजूद एक छोटा डीएनए अणु है। यह सबसे अधिक जीवाणु कोशिकाओं में पाया जाता है। जब प्लास्मिड-डीएनए शरीर में प्रवेश करता है, तो यह एक वायरल प्रोटीन में परिवर्तित हो जाता है। यह वायरस के खिलाफ एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बनाता है।


इस तरह के टीके की एक खास बात यह है कि इसे कुछ ही हफ्तों में अपडेट किया जा सकता है। यदि वायरस उत्परिवर्तित होता है, तो इसे कुछ हफ्तों में बदला जा सकता है।


डीएनए वैक्सीन को अधिक प्रभावी और मजबूत माना जाता है। चेचक सहित कई बीमारियों के लिए अब तक जो टीके उपलब्ध हैं, वे सभी डीएनए आधारित हैं।


इसका मूल्य कितना होगा?


केंद्र सरकार ने वैक्सीन की एक करोड़ डोज का ऑर्डर दिया था। कंपनी ने इसकी आपूर्ति शुरू कर दी है। वैक्सीन अब सरकार की ओर से नि:शुल्क मुहैया कराई जाएगी।


कंपनी ने एक डोज की कीमत 265 रुपये रखी है। इसके अलावा हर डोज पर 93 रुपये का जीएसटी भी लगेगा। यानी एक खुराक की कुल कीमत 358 रुपये होगी।


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